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क्रमांक-३/२००९ जय हनि मांगा है फूल उनके लिए, हम काँटो पर सो जायेगें। ये राज की बात है, उन्हे प्यार से समझायेंगे॥ नजरे करम हम पर होती नहीं, लज्जा मे रहकर सलीके से, तुम कुछ कहती हो। ईशारे से वो बात, हम कब समझ पायेंगे॥ उन्हे हम प्यार से समझायेंगे॥ सुराख हुआ है कस्ती मे मेरी, उनके बिना जीने मे, अब मज़ा आने लगा है। ऐसी बात हम, 'अभि' न समझ पायेंगे॥ उन्हे हम प्यार से समझायेंगे॥ शब्द का प्रयोग जिसके लिए किया है- राज-प्यार, नजरे करम-एक झलक ही दे दे, |