मैं 'AM' ''सुबह'' तुम 'PM' ''सांझ'' हो, मैं ''आम'' तुम ''खास'' हो,
प्रेम के बंधन में बांधेंगे ऐसे, जैसे तुम मेरी ''जान'' हो।
कलम उठाई आज तो कुछ लिखा जाये, कुछ समय तेरे नाम लिखा जाये,
बातें तो फोन पर भी हो सकती है बहुत, 'अभि' तुझे निहारा जाय।
किसी की परवाह मत करना, मरने की हिमाकत मत करना,
मिलन होगा हमारा मगर, जमाने की परवाह ‘अभि’ मत करना।
अभिषेक मिश्रा 'अभि'
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