| चंद्रमा- मन, मंगल- रक्त संचार, बुध- हृदय, बृहस्पति- बुद्धि, शुक्र- प्रत्येक रस तथा शनि,राहु और केतु- उदर का स्वामी है। |
हम सभी जानते है की कुंडली कुल बारह भाव होते है सभी भावे के अलग-अलग स्वामी होते है … किस भाव में कौन सा गृह ख़राब है , और उसका उपाय कैसे करें.
जिस ग्रह से संबंधित वस्तुृओं को....
| सूर्य | चन्द्र | मंगल | बुध | बृहस्पति | शुक्र | शनि | राहू | केतू |
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प्रत्येक जातक की कुंडली में अशुभ ग्रहों की स्थिति अलग-अलग रहती है, परंतु कुछ कर्मों के आधार पर भी ग्रह आपको अशुभ फल देते हैं। व्यक्ति के कर्म-कुकर्म के द्वारा किस प्रकार नवग्रह के अशुभ फल प्राप्त होते हैं, आइए जानते हैं :
किसी का दिल दुखाने (कष्ट देने), किसी भी प्रकार का टैक्स चोरी करने एवं किसी भी जीव की आत्मा को ठेस पहुँचाने पर सूर्य अशुभ फल देता है।
| मेष राशि | वृषभ राशि | मिथुन राशि | कर्क राशि | सिंह राशि | कन्या राशि | तुला राशि | वृश्चिक राशि | धनु राशि | मकर राशि | कुंभ राशि | मीन राशि |
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जानिए चंद्र देव को... सोमवार के स्वामी हैं चंद्र देवसम्मानजनक स्त्रियों को कष्ट देने जैसे, माता, नानी, दादी, सास एवं इनके पद के समान वाली स्त्रियों को कष्ट देने एवं किसी से द्वेषपूर्वक ली वस्तु के कारण चंद्रमा अशुभ फल देता है।
* सोम के रूप में वे सोमवार के स्वामी हैं।
* वे सत्व गुण वाले हैं और मन, माता की रानी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
* चंद्र को सोम के रूप में जाना जाता है और उन्हें वैदिक चंद्र देवता सोम के साथ पहचाना जाता है।
* उन्हें जवान, सुंदर, गौर, द्विबाहु के रूप में वर्णित किया गया है।
* उनके हाथों में एक मुगदर और एक कमल रहता है।
* वे हर रात पूरे आकाश में अपना रथ (चांद) चलाते हैं, जिसे दस सफेद घोड़े या मृग द्वारा खींचा जाता है।
| मेष राशि | वृषभ राशि | मिथुन राशि | कर्क राशि | सिंह राशि | कन्या राशि | तुला राशि | वृश्चिक राशि | धनु राशि | मकर राशि | कुंभ राशि | मीन राशि |
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भाई से झगड़ा करने, भाई के साथ धोखा करने से मंगल के अशुभ फल शुरू हो जाते हैं। इसी के साथ अपनी पत्नी के भाई (साले) का अपमान करने पर भी मंगल अशुभ फल देता है।
| मंगल की उच्च राशि मकर है और कर्क नीच राशि है। मेष व वृश्चिक स्वराशि है तथा सिंह, धनु व मीन से इसकी मित्रता है। मंगल बुध से समभाव रखता है व इसकी शत्रुता शुक्र की राशि वृषभ, तुला व कुंभ से है। इन राशियों पर मंगल की दृष्टि बुरा असर डालती है। |
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| मेष राशि | वृषभ राशि | मिथुन राशि | कर्क राशि | सिंह राशि | कन्या राशि | तुला राशि | वृश्चिक राशि | धनु राशि | मकर राशि | कुंभ राशि | मीन राशि |
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पहला घर - भाई।
दूसरा घर - बड़ा भाई।
तीसरा घर - ताऊ।
चौथा घर - मामा।
पांचवां घर - मित्र।
छठा घर - बहनोई (जीजा) ।
सातवां घर- भाई या साला।
आठवां घर- छोटे भाइयों के लिए दुष्ट भाई।
नौवां घर- दादा का भाई (बाबा)।
दसवां घर- पिता का धर्म भाई।
ग्यारहवां घर- पिता का दिखावी भाई।
बारहवां घर- बड़े भाई के खून का प्यासा भाई।
मंगल की वस्तुएं : -पहला घर - दांत, सफेद अनाज की रोटी।
दूसरा घर - चिंता, मृग।
तीसरा घर - पेट, होंठ, छाती।
चौथा घर - तलवार, डेक का वृक्ष।
पांचवां घर - भाई, नीम का वृक्ष।
छठा घर - नाभि, छछून्दर।
सातवां घर- वृक्ष, फलदार पौधे, बेलें, लताएं।
आठवां घर- िबना बांहों का शरीर।
नौवां घर- लाल रंग (रक्तिम)।
दसवां घर- देशी खांड, शहद, मीठा भोजन।
ग्यारहवां घर- लाल रंग का सिंदूर।
बारहवां घर- ऊंची आवाज।
मंगल ग्रह से साहस, ऊर्जा, शक्ति, गुस्सा, रक्त, पराक्रम, आक्रामक शैली, युद्ध, राजयोग, शत्रु, लाल रंग, हानि, गर्मी, राजसेवा, रोग, प्रसिद्धि, हड्डी, युवावस्था, भाई, वन क्षेत्र, पुलिस-सेना, आई.पी.एस., मूत्र रोग, ठेकेदार, अग्नि, आग से जलना, मकान-भूमी, रक्त व इससे संबंधित रोग, माँस-भक्षण, दण्डाधिकारी, पारा, कृषि-भूमि, सोना, ताँबा, भोजन, गंभीरता, वाहन-सुख आदि देखा जाता है।
मेष लग्न हो तो मंगल लग्नेश व अष्टम भाव का स्वामी होगा। इस लग्न में मंगल चतुर्थ भाव में नीच राशि कर्क में होने उपरोक्त कारक तत्वों में कमी लाएगा। स्वास्थ्य पर भी विपरित असर पड़ेगा, चोट भी लग सकती है। दुर्घटना के योग भी बन सकते हैं।
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वृषभ लग्न में मंगल द्वादशेश व सप्तम भाव का स्वामी होगा। द्वादश भाव बाहरी संबंध, विदेश यात्रा, भोग विलास, बाई आँख व सप्तम दाम्पत्य जीवन, सेक्स, विवाह संबंध, दैनिक व्यवसाय, स्त्री से संबंधित भाव को बिगाड़ता है। इसमें मंगल नीच का तृतीय भाव में होगा।
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मिथुन लग्न में मंगल एकादशेश व षष्टेश होगा। एकादश आय भाव शेयर बाजार से जुड़े व्यक्ति को क्षति पहुँचाएगा, षष्टेश होने से शत्रुओं में, कर्ज वृद्धि का कारण बनता है।
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कर्क लग्न में दशम व पंचम भाव का स्वामी होगा। दशम पिता, राज्य, नौकरी, व्यापार, राजनीति के क्षेत्र में बाधा का कारण बनता है। वही संतान, विद्या, मनोरंजन, प्रेम संबंधों में भी क्षति का कारण बनता है। मंगल लग्न में ही नीच का होगा।
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सिंह लग्न में मंगल नवम व चतुर्थ भाव का स्वामी होगा। भाग्येश होने से धर्म-कर्म में कमी, भाग्य में अवरोध, यश में कमी का कारण बनता है। चतुर्थेश होने से सुख में कमी, माता से अनबन, मकान की परेशानी का कारण बनता है। स्थानीय राजनीति में भी नुकसानप्रद होता है। इस लग्न में मंगल द्वादशेश में नीच का होगा।
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कन्या लग्न में मंगल अष्टम व तृतीयेश होगा। अष्टम, आयु, गुप्त रोग, गुप्त धन में क्षति का कारण बनता है। वहीं तृतीयेश होने से भाई से विरोध या भाई का न होना, मित्र से गड़बड़, साझेदार से परेशानी, पड़ोसी से अनबन का कारण बनता है। इस लग्न में मंगल एकादश भाव में नीच का होगा।
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तुला लग्न में सप्तम व द्वितीय भाव का स्वामी होगा। सप्तम भाव दाम्पत्य जीवन, सेक्स, मारक भाव, दैनिक व्यवसाय इनमें नुकसानदायक रहेगा। द्वितीय होने से धन, कुटुंब, वाणी, दाईं आँख, बचत में कमी की कारण बनता है। इसमें मंगल दशम भाव में नीच का होगा।
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वृश्चिक लग्न में लग्नेश व षष्ट भाव का स्वामी होगा। लग्नेश होने से साहस में कमी, काम में मन न लगना, चिड़चिड़ापन रहना यह कारण बनते है। षष्टेश होने से नाना, मामा का घर बिगाड़ता है वही कर्जदार भी बनाता है। शत्रुओं से परेशानी का कारण भी बनता है। इस लग्न में मंगल नवम भाव में नीच का होगा।
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धनु लग्न में मंगल पंचम व द्वादश भाव का स्वामी होगा। पंचम होने से विद्या में रूकावट, संतान बाधा का कारण बनता है, वहीं विदेश यात्रा में बाधा, पढा़ई आदि में रूकावट आती है। इस भाव में मंगल अष्टम में नीच का होगा।
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मकर लग्न में मंगल चतुर्थ व एकादश भाव का स्वामी होगा। यह आय के क्षेत्र में व माता, भूमि-मकान से संबंधित मामलों में रूकावट डालेगा। इस लग्न में मंगल सप्तम भाव में नीच का होगा।
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कुंभ लग्न में मंगल तृतीय व दशम भाव का स्वामी होगा। साझेदारी, शत्रु, भाई से बाधा का कारण बनता है। लाभ के मामलों में भी रूकावट पैदा करेगा। इस लग्न में मंगल षष्ट भाव में नीच का होगा।
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मीन लग्न में मंगल द्वितीय व नवम भाव का स्वामी होगा। यह वाणी को कठोर बनाता है व काम बिगाड़ता है। कुटुंब से नहीं बनने देता है। भाग्य में रूकावट का सामना करना पड़ता है। धर्म-कर्म में भी मन नहीं लगता।
| मंगल पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि का प्रभाव भी खराब होता है। मंगल के अशुभ प्रभाव मिल रहे हो तो मंगल से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। जैसे- खड़े मसूर, गुड, ताँबा, लाल वस्तु आदि व किसी विद्वान को जन्म पत्रिका दिखाकर शुभ मुहूर्त में मूँगा धारण करें। |
अपनी बहन अथवा बेटी को कष्ट देने एवं बुआ को कष्ट देने, साली एवं मौसी को कष्ट देने से बुध अशुभ फल देता है। इसी के साथ हिजड़े को कष्ट देने पर भी बुध अशुभ फल देता है।
बुध चंद्रमा के पुत्र हैं। उनकी माता का नाम रोहिणी हैं। उन्हें विद्वान और अथर्ववेद के ज्ञाता माना जाता है। उनका विवाह वैवस्वत मनु की पुत्री इला से हुआ। देवों की सभा में बुध को राजकुमार कहा गया है।
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अपने पिता, दादा, नाना को कष्ट देने अथवा इनके समान सम्मानित व्यक्ति को कष्ट देने एवं साधु संतों को कष्ट देने से गुरु अशुभ फल देता है।
* बृहस्पति (Jupiter), देवताओं के गुरु हैं।
* गुरु शील और धर्म के अवतार हैं।
* प्रार्थनाओं और बलिदानों के मुख्य प्रस्तावक हैं, जिन्हें देवताओं के पुरोहित के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
* बृहस्पति सत्व गुणी हैं और ज्ञान और शिक्षण का प्रतिनिधित्व करते हैं।
* हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, वे देवताओं के गुरु हैं और दानवों के गुरु शुक्राचार्य के कट्टर विरोधी हैं।
* बृहस्पति पीले या सुनहरे रंग के हैं और एक छड़ी, एक कमल और अपनी माला धारण करते हैं।
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अपने जीवनसाथी को कष्ट देने, किसी भी प्रकार के गंदे वस्त्र पहनने, घर में गंदे एवं फटे पुराने वस्त्र रखने से शुभ-अशुभ फल देता है।
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ताऊ एवं चाचा से झगड़ा करने एवं किसी भी मेहनतम करने वाले व्यक्ति को कष्ट देने, अपशब्द कहने एवं इसी के साथ शराब, माँस खाने पीने से शनि देव अशुभ फल देते हैं। कुछ लोग मकान एवं दुकान किराये से लेने के बाद खाली नहीं करते अथवा उसके बदले पैसा माँगते हैं तो शनि अशुभ फल देने लगता है।
* शनि (Saturn), शनिवार के स्वामी है।
* शनि हिन्दू ज्योतिष में नौ मुख्य खगोलीय ग्रहों में से एक है।
* शनि की प्रकृति तमस है और कठिन मार्गीय शिक्षण, करियर और दीर्घायु को दर्शाता है।
* शनि शब्द की व्युत्पत्ति 'शनये क्रमति सः' से हुई अर्थात, वह जो धीरे-धीरे चलता है।
* शनि को सूर्य की परिक्रमा में 30 वर्ष लगते हैं।
* उनका चित्रण काले रंग में, एक तलवार, तीर और दो खंजर लिए हुए होता है और वे अक्सर एक काले कौए पर सवार होते हैं।
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राहु सर्प का ही रूप है अत: सपेरे का दिल दुखाने से, बड़े भाई को कष्ट देने से अथवा बड़े भाई का अपमान करने से, ननिहाल पक्ष वालों का अपमान करने से राहु अशुभ फल देता है।
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Go To Listभतीजे एवं भांजे का दिल दुखाने एवं उनका हक छीनने पर केतु अशुभ फल देना है। कुत्ते को मारने एवं किसी के द्वारा मरवाने पर, किसी भी मंदिर को तोड़ने अथवा ध्वजा नष्ट करने पर इसी के साथ ज्यादा कंजूसी करने पर केतु अशुभ फल देता है। किसी से धोखा करने व झूठी गवाही देने पर भी राहु-केतु अशुभ फल देते हैं।
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